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लेखनी प्रतियोगिता -23-Mar-2022मेरा घर

घर की  परिभाषा  हमतो इस तरह कहते है

जहाँ एक छत की नीचे इन्सा मिलकर रहते है
 सब  आपस में प्यार की बरसात किया करते है।
एक दूसरे के दुःख सुख मे साथ दिया करते है।।
अपने  से बडौ़ का सदा  आदर किया  करते है।
ये घर ईट गारे से नहीं इन्सानौ के लहू से बनते है।।
यह केवल  मकान नही प्यार का आशियाना है।
यह हमारे पूर्वजौ का बनाया प्यार का आशियाना है।।
ऐसा घर होता है सबका बहुत प्यारा।
यह घर होता है  स्वर्ग से भी अयि प्यारा।।

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14 Comments

Punam verma

24-Mar-2022 09:43 PM

Very nice

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Naresh Sharma "Pachauri"

25-Mar-2022 09:11 AM

धन्यवाक्षदजी

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Seema Priyadarshini sahay

24-Mar-2022 06:11 PM

बहुत खूबसूरत

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Naresh Sharma "Pachauri"

25-Mar-2022 09:11 AM

धन्यवादजी

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Renu

24-Mar-2022 11:42 AM

बहुत ही बेहतरीन रचना

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Naresh Sharma "Pachauri"

24-Mar-2022 11:44 AM

Very very thanks

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